vikram7
मंगलवार, १९ अगस्त २००८
अर्थ हीन.....
अर्थ हीन संवादों का सिलसिला
मै तोडना नही चाहता
शायद इसी बहाने
मै तुम्हे छोडना नही चाहता
विक्रम
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जीवन का सफर चलता ही रहें ,चलना हैं इसका काम
दे पिला ये सुर्ख से रंग .............
अर्थ हीन.....
आज चली कुछ.......................
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पीर को भी प्यार से.....................
इन्हें भूलने.............
कितना कठिन मिलन हैं साथी .........
वह पागल थी ...............
साथी अब न रहा जाता है
आज रात कुछ थमी-थमी सी
आज फिर कुछ खो रहा हूँ ..
बडप्पन क्या होता हॆ, वह मुझे समझा गयी
देश अव्यवस्था के भयानक चक्रवात से गुजर रहा होगा
मैं जीवन का बोधि-सत्व क्याँ खो बैठा हूँ
दर्द को दिल में उतर जाने दो
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June
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ओ मधुमास मेरे जीवन के ......
जीवन जीना ही पडता हैं ............
क्या भूलूं क्या याद करूं मॆ.........
वक्त ने दिया शिला..................
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क्यूँ चुप हो कुछ बोलो श्वेता...
एक उदासी इन्ही उनीदीं .पलकों के कर नाम
ओस जब बन बूँद बहती, पात का कम्पन मे छा रहा है
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साथी बैठो कुछ मत बोलो
वह सुनयना थी ...............
कितनी खुशियाँ कितने ही गम जीवन में, संजोया
मेरे जीवन में जब भी, अधियारे पल हैं आये
मेरे हालात पर भी न, इतना रहम खाओ तुम
बड़ा कौन ............
सच नही कोई परिंदा, जाल मे फँस जाएगा
हम आप की राहों में .................
दर्द को दिल में उतर जाने दो
दर्दों के साए में भी हम ,खेलेगे रंगोली
ऐ जिंदगी तुझे क्यूँ ..........
तिमिर बहुत गहरा होता हैं
►
March
(22)
बहुत खोया हैं मैने, जिन्दगी को जिन्दगी के वास्ते
होली की हार्दिक शुभकामनायें
ख्वाब सी यह जिन्दगी ,इस जिन्दगी से क्याँ गिला
थे जब तक दिल मे तुम मेरे...............
मेरी आकांक्षाओं का .....................
नहीं क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे
एक मुट्ठी दायरे में ..................
जीवन की जब शाम यहां पर आयेगी
गीत नया गायेगे..................
आइये आसुओं से समुंदर रचे.....
चलो आज कुछ नया करें हम
जीवन का सफर चलता ही रहें चलना हैं इसका काम
मृग चितवन मे बंधा बंधा सा
ऎ काश ऎसा होता यहां पर..........
पथिक .........
अल्ला मेघ दे...........
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